Monday, 8 January 2018

भारत नेट चरण-। : ध्‍यानपूर्वक बनाई गई योजना तथा धरातल पर कार्यान्‍वयन की ओर ध्‍यान केंद्रित करने से लक्ष्‍य प्राप्‍ति

भारत नेट चरण-। : ध्‍यानपूर्वक बनाई गई योजना तथा धरातल पर कार्यान्‍वयन की ओर ध्‍यान केंद्रित करने से लक्ष्‍य प्राप्‍ति

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सरकार ने घोषित अंतिम तिथि 31 दिसम्‍बर, 2017 के अनुसार उच्‍च गति वाले ऑप्‍टिकल फाइबर नेटवर्क के साथ पूरे देश में एक लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को जोड़कर भारत नेट के अंतर्गत परियोजना का पहला चरण पूरा करके एक महत्‍वपूर्ण उपलब्‍धि हासिल कर ली है। चरण -1 के तहत तैयार भारतनेट नेटवर्क के अंतर्गत 2.5 लाख गांव में उच्‍च गति की ब्रॉड बैंड सेवाएं उपलब्‍ध करवाने की व्‍यवस्‍था है, जिससे 200 मिलियन से भी अधिक ग्रामीण भारतीय लाभान्‍वित होंगे।

यहां आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री श्री मनोज सिन्‍हा ने कहा कि देश का विजन और मिशन डिजिटल विभाजन को समाप्‍त कर भारत को जोड़ना है ताकि प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया के लक्ष्‍य को पूरा किया जा सके। 

भारतनेट को सृजन, समन्‍वय और सफलता के मंत्र पर सृजित विश्‍व की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉड बैंड परियोजना करार देते हुए श्री सिन्‍हा ने कहा कि यह परियोजना आने वाले दिनों में देश में प्रत्‍यक्ष तथा अप्रत्‍यक्ष दोनों प्रकार से भारी संख्‍या में रोजगार अवसर सृजित करेगी। उन्‍होंने भारतनेट के दूसरे चरण को मार्च, 2019 के लक्ष्‍य से काफी पहले ही पूरा करने की जरूरत पर जोड़ दिया ताकि 2 लाख 50 हजार ग्राम पंचायतों को ब्रॉड बैंड नेटवर्क से जोड़कर ग्रामीण डिजिटल क्रांति लाई जा सके। मंत्री ने अधिकारियों से चरण-2 परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए वित्‍तीय पुरस्‍कार का प्रावधान लागू करने के लिए कहा तथा यह भी कहा कि भारतनेट के अंतर्गत सृजित अवसंरचना एक राष्‍ट्रीय संपत्‍ति होगी जो सेवा प्रदाताओं को बिना किसी भेदभाव के उपलब्‍ध रहेगी। परियोजना का उद्देश्‍य राज्‍यों तथा निजी क्षेत्र की हिस्‍सेदारी से ग्रामीण तथा दूर-दराज के क्षेत्रों में नागरिकों एवं संस्‍थानों को सुलभ ब्रॉड बैंड सेवाएं उपलब्‍ध कराना है।

परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत 31 मई 2014 तक 4918 जीपीएस में काम शुरू किया गया था तथा 358 किलोमीटर ऑप्‍टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) डाली गई थी तथा केवल 59 जीपीएस सेवा के लिए तैयार किया जा सका था। 30 जून, 2016 तक 84,834 जीपीएस का काम शुरू हुआ था तथा 1,24,817 किलोमीटर ओएफसी डाली गई थी जिससे 53,557 जीपीएस कवर किए गए और 7229 जीपीएस सेवा के लिए तैयार हुआ था। 31 दिसम्‍बर, 2017 को 1,09,926 जीपीएस कवर करने के लिए 1,54,895 किलोमीटर ओएफसी डाल दी गई है, जिसमें से 1,01,370 जीपीएस सेवा के लिए तैयार कर दी गई है।

इस अवसर पर बोलते हुए टेलीकॉम विभाग की सचिव सुश्री अरूणा सुंदराराजन ने कहा कि भारतनेट चरण । को पूरा करने के लिए विभाग का संपूर्ण पारिस्‍थितिकी तंत्र मंत्री श्री मनोज सिन्‍हा के आह्वान पर जुट गया। उन्‍होंने कहा कि इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिला है, क्‍योंकि परियोजना की मुख्‍य विशेषता इसमें लगाए गए टेलीकॉम उपस्‍कर पूर्णत: भारत में डिजाइन, विकसित तथा निर्मित किए गए हैं। उन्‍होंने कहा कि इस परियोजना ने प्रतिदिन 800 किलोमीटर ऑप्‍टिकल फाइबर डालकर विश्‍व रिकॉर्ड भी बनाया है। उन्‍होंने यह उम्‍मीद जाहिर की कि भारतनेट अवसंरचना ग्रामीण गरीबों को स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, जीविका, कौशल, ई-कृषि तथा ई-वाणिज्‍य जैसी सेवाओं की डिजिटल सुपुर्दगी को प्रोत्‍साहित करेगी। भारतनेट के लिए टैरिफ भी संशोधित किया गया ताकि अधिक से अधिक टेलीकॉम सेवा प्रदाता (टीएसपी) को आकर्षित किया जा सके जो वाईफाई, एफटीटीएच के माध्‍यम से ग्रामीण क्षेत्रों में उच्‍च गति ब्रॉड बैंड सेवाएं प्रदान करने तथा टीपीएस और सामान्‍य सेवा केंद्रों द्वारा उपयोग में आने वाले मॉडल तैयार करने के लिए अवसंरचना का लाभ उठा सकें।

टेलीकॉम विभाग ने उन प्रमुख कार्यकर्ताओं तथा हितधारकों को पुरस्‍कृत किया जिन्‍होंने लक्ष्‍य प्राप्‍ति में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया था। श्री मनोज सिन्‍हा ने सर्वश्रेष्‍ठ कार्य करने वाले राज्‍यों, सभी जीपीएस पूरा करने वाले राज्‍यों, भारतनेट का सर्वोत्‍तम उपयोग करने वालों, सर्वोत्‍तम कार्यान्‍वयन निष्‍पादक भागीदारों, सर्वश्रेष्‍ठ उपस्‍कर आपूर्ति भागीदारों, सर्वश्रेष्‍ठ ओएफसी आपूर्ति भागीदारों, सर्वश्रेष्‍ठ प्रौद्योगिकी भागीदारों तथा व्‍यक्‍तिश: महत्‍वपूर्ण योगदान करने वाले व्‍यक्‍तियों को पुरस्‍कार प्रदान किए।

पुरस्‍कार प्राप्‍त करने वाली कोटि में उत्‍तर प्रदेश (पूर्व), महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ, राजस्‍थान तथा झारखंड को सर्वश्रेष्‍ठ निर्वाहक राज्‍यों के रूप में आंका गया, जिन्‍होंने भारतनेट चरण-। लागू किया। केरल, कर्नाटक तथा हरियाणा ऐसे राज्‍य थे जिन्‍होंने इस परियोजना के तहत सभी जीपीएस पूरे कर लिए थे। कर्नाटक ने भारतनेट के सर्वश्रेष्‍ठ उपयोगकर्ता का पुरस्‍कार प्राप्‍त किया। भारत संचार निगम लिमिटेड तथा सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड ने सर्वश्रेष्‍ठ कार्यान्‍यन निर्वहन भागीदार का पुरस्‍कार प्राप्‍त किया, जबकि तेजस नेटवर्क्‍स एंड इंडियन टेलीफोन इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड को सर्वश्रेष्‍ठ उपस्‍कर आपूर्तिकर्ता का निर्वहन करने के लिए सम्‍मानित किया गया। फिनोलेक्‍स केबल्‍स, स्‍टर्लाइट टेक्‍नोलोजिज एंड विंध्‍या टेलीलिंक्‍स लि. को सर्वश्रेष्‍ठ भारतीय ऑप्‍टिकल्‍स फाईबर केबल (ओएफसी) आपूर्तिकर्ता के निर्वहन हेतु पुरस्‍कृत किया गया। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्‍स (सीडीओटी) तथा नेशनल इंफोरमेटिक्‍स सेंटर (एनआईसी) को सर्वश्रेष्‍ठ प्रौद्योगिकी भागीदार पुरस्‍कार प्रदान किए गए।

मंत्री ने व्‍यक्‍तिश: महत्‍वपूर्ण योगदान करने वालों में श्री महमूद अहमद, जेएएफ, यूएसओएफ, श्री रुपेन्‍द्र कुमार, निदेशक (बीबी), यूएसओएफ श्रीमती दीपिका खोसला, मु.म.प्र. बीबीएनएल, श्री दीपक चंदुका, मु.म.प्र., बीबीएनएल, श्री शाहनवाज आलम, मु.म.प्र. बीबीएनएल, श्री अनिल कुमार गुप्‍ता, मु.म.प्र. बीबीएनएल, श्री विनोद कुमार, मु.म.प्र. बीबीएनएल, श्री पी.के. पांडा, म.प्र., बीबीएनएल तथा बी पी मीणा, म.प्र., बीबीएनएल को पुरस्‍कार प्रदान किए।       
   
                      
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वीके/एएम/जेडी/एसकेपी– 6218

मंत्रिमंडल ने 2017-18 से 2019-20 की अवधि के लिए ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (एससीबीटीएस)’ को मंजूरी दी

मंत्रिमंडल ने 2017-18 से 2019-20 की अवधि के लिए ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (एससीबीटीएस)’ को मंजूरी दी 

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 मंत्रिमंडल ने 2017-18 से 2019-20 की अवधि के लिए ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (एससीबीटीएस)’ को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने संगठित क्षेत्र में कताई और बुनाई को छोड़कर कपड़ा क्षेत्र की समूची मूल्य श्रृंखला को शामिल करते हुए एक नई कौशल विकास योजना को मंजूरी दी है। इसे ‘कपड़ा क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना (एससीबीटीएस)’ नाम दिया गया है। इस योजना को 1300 करोड़ रुपये के लागत-खर्च के साथ 2017-18 से लेकर 2019-20 तक की अवधि के लिए स्वीकार किया गया है। इस योजना में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सामान्य मानकों के आधार पर राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम होंगे।
योजना का उद्देश्य संगठित कपड़ा क्षेत्र और उससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के संबंध में उद्योग के प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए मांग आधारित, प्लेसमेंट संबंधी कौशल कार्यक्रम, कपड़ा मंत्रालय के संबंधित संगठनों के माध्यम से कौशल विकास और कौशल उन्नयन को प्रोत्साहन देना तथा देशभर के हर वर्ग को आजीविका प्रदान करना है।
कौशल कार्यक्रम का क्रियान्वयन इस प्रकार किया जाएगा-
  1. श्रम शक्ति की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कपड़ा उद्योग/इकाई द्वारा,
  2. कपड़ा उद्योग/इकाईयों के साथ रोजगार समझौते के तहत प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थान द्वारा, और
  3. कपड़ा उद्योग/इकाईयों के साथ रोजगार समझौते के संबंध में कपड़ा मंत्रालय/राज्य सरकारों के संस्थानों द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।
योजना के तहत निम्नलिखित रणनीति अपनाई जाएगी-
  1. संबंधित कार्य को ध्यान में रखते हुए कौशल लक्ष्य के विभिन्न स्तरों यानी प्रवेश स्तर के पाठ्यक्रम, कौशल उन्नयन, निरीक्षण, प्रबंधन प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए उन्नत पाठ्यक्रम सहित कौशल विकास, प्रशिक्षण, उद्यमशीलता विकास के आधार पर रणनीति अपनाई जाएगी।
  2. उद्योग के साथ सलाह करके समय-समय पर कौशल की आवश्यकताओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
  3. कार्यक्रम के क्रियान्वयन के हर पक्ष के संचालन के लिए वेब आधारित निगरानी की जाएगी।
  4. हथकरघा, हस्तशिल्प, पटसन, रेशम इत्यादि जैसे परम्परागत क्षेत्रों की कौशल संबंधी जरूरतों पर संबंधित क्षेत्रीय उपखंडों/संगठनों के जरिए विशेष परियोजनाओं के स्वरूप पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा ‘मुद्रा’ ऋणों के प्रावधानों के जरिए उद्यमशीलता के विकास के संबंध में कौशल उन्नयन को समर्थन दिया जाएगा।
  5. नतीजों की पड़ताल के लिए सफल प्रशिक्षुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। मान्यता प्राप्त मूल्यांकन एजेंसी द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
  6. प्रमाणित प्रशिक्षुओं में से कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षुओं को दिहाड़ी रोजगार वर्ग में रखा जाएगा। योजना के तहत रोजगार मिलने के पश्चात उन पर अनिवार्य रूप से नजर रखी जाएगी।
  7. इस क्षेत्र में प्रशिक्षण के बाद महिलाओं के रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि को ध्यान में रखते हुए सभी भागीदार संस्थानों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं निर्वारण) अधिनियम, 2013 के तहत आंतरिक शिकायत समिति का गठन करने संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे, तभी वे इस योजना के तहत वित्तपोषण के पात्र होंगे।
यह योजना देशभर में समाज के सभी वर्गों के लाभ के लिए लागू की जाएगी, जिसमें ग्रामीण, दूर-दराज के इलाके, वामपंथ उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र, पूर्वोत्तर तथा जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांगों, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर वर्गों को वरीयता दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि 12वीं योजना के दौरान कपड़ा मंत्रालय के द्वारा क्रियान्वित कौशल विकास की तत्कालीन योजना के तहत 10 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं थी। इस योजना के तहत परिधान उद्योग एक प्रमुख क्षेत्र है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें लगभग 70 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार मिलता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए योजना में इसे शामिल किया गया है।
आशा कि जाती है कि योजना के जरिए कपड़ा क्षेत्र से संबंधित विभिन्न वर्गों में 10 लाख लोगों का कौशल विकास होगा और उन्हें प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इनमें से एक लाख लोग परम्परागत क्षेत्रों में होंगे।
पृष्ठभूमि
कपड़ा मंत्रालय ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतिम दो वर्षो के दौरान पायलट योजना के रूप में एकीकृत कौशल विकास योजना को शुरू किया था। इसका लागत-खर्च 272 करोड़ रुपये थी, जिसमें 229 करोड़ रुपये सरकार का अंशदान था। इसके तहत 2.56 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया था। इस योजना को 15 लाख लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए 1900 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान जारी रखा गया था। उल्लेखनीय है कि एकीकृत कौशल विकास योजना, उद्योग संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कपड़ा उद्योग में कुशल श्रम शक्ति की बड़ी कमी को पूरा करती है। योजना का क्रियान्वयन तीन घटकों के माध्यम से किया गया है। इसमें निजी-सार्वजनिक भागीदारी प्रणाली पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत मांग आधारित कुशल विकास इको-प्रणाली को स्थापित करने में उद्योग के साथ भागीदारी विकसित की गई है। योजना के तहत अब तक 10.84 लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया गया है इनमें 10.12 लाख लोगों का आकलन किया गया है और 8.05 लाख लोगों का प्लेसमेंट हुआ है। योजना को मुख्यतः कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सामान्य मानदंडों के अनुरूप तैयार किया गया है।


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वर्षांत समीक्षा 2017 : पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा 2017 : पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय


एक अभूतपूर्व फैसले के तहत राष्ट्रपति ने नवंबर में भारतीय वन (संशोधन) विधेयक को लागू किया, जिसके तहत ‘वृक्ष’ की परिभाषा के दायरे से गैर वन क्षेत्रों में बांस को अलग कर दिया गया है। इस निर्णय से आर्थिक इस्तेमाल के लिए बांस को काटने संबंधी अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इस फैसले को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सम्पन्न होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई। इसे एक ऐतिहासिक निर्णय कहा गया क्योंकि पहले भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत बांस को वैधानिक रूप से ‘वृक्ष’ के रूप में परिभाषित किया गया था। इसके कारण गैर किसानों द्वारा गैर वन जमीन पर बांस की खेती में बाधा आती थी


पूर्वोत्तर को भारत की पहली ‘एयर डिस्पेंसरी’ मिलना तय है। इसके तहत हेलीकॉप्टर के जरिये चिकित्सा सेवा प्रदान की जाएगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने इस पहल के लिए 25 करोड़ रुपये की आरंभिक धनराशि जारी कर दी है। डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय दूरदराज के इलाकों में हेलीकॉप्टर आधारित चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने संबंधी संभावनाएं देख रहा है। ये ऐसे इलाके हैं जहां कोई डॉक्टर या चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय ने प्रस्ताव भेज दिया है और इसे मंजूर भी कर लिया गया है। यह प्रस्ताव नागरिक विमानन मंत्रालय के पास मौजूद है और इसकी प्रक्रिया अंतिम चरणों में है।


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स्वदेशी जीपीएस

स्वदेशी जीपीएस

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भारत ने एनएवीआईसी (NAVIC) नामक अपनी क्षेत्रीय नौपरिवहन प्रणाली तैनात की है, जिसमें 7 नौपरिवहन उपग्रह का तारामंडल तथा भारतीय क्षेत्र को स्थिति, नौवहन तथा समय सेवाएं प्रदान करने के लिए संबद्ध सतही वृत्तखंड की व्यवस्था है


एनएवीआईसी भारत और इसके परिवेश सहित अंतरिक्ष में संकेत प्रदान करता है, यह स्थिति और समय को सही ढंग से निर्धारित करने के लिए जमीन पर रिसीवर का उपयोग करके उपयोग में लाया जा सकता है। 

विश्व में अंतरिक्ष में संकेत अमेरिका के जीपीएस, रूस के ग्लोनास, यूरोप के गैलीलियो और चीन के बेइडेन द्वारा मुहैया कराये जाते हैं। मौजूदा वैश्विक प्रवृत्ति, भू-आदाता का उपयोग करने के लिए है जो समय और स्थिति संबंधी समाधान प्रदान करने के लिए उपलब्ध कई संकेतों का उपयोग करते हैं।


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सौर अभियान


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) प्रथम सौर अभियान, आदित्य-एल-1 शुरू करने की योजना बना रहा है।

आदित्य-एल-1 अभियान का उद्देश्य सूर्य-पृथ्वी के इर्द-गिर्द कक्षा से लेंग्रेगियन प्वाइंट (एल-1) जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर है, सूर्य का अध्ययन करना है। यह फोटो स्फियर, क्रोमोस्पियर तथा सूर्य की बाहरी परत, विभिन्न वेवबैंडस में प्रभामंडल के अध्ययन के लिए सात अंतरिक्ष उपकरण ले जाएगा।

आदित्य एल-1 राष्ट्रीय संस्थानों के योगदान वाला एक पूर्णत: स्वदेशी प्रयास है। इण्डियन इस्टींट्यूट आफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए), बैंगलुरू, विजिबल इमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) के विकास के लिए एक अग्रणी संस्थान है तथा इन्टर यूनिवर्सिटी सेंटर फार एस्टोनोमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए), पुणे सोलर अल्ट्रा वायलेट इमेजर (एसयूआईटी) आदित्य एल-1 अभियान के लिए अंतरिक्ष उपकरण विकसित कर रहा है।

आदित्य एल-1 प्रभामंडल पर निष्कर्ष दे सकता है तथा इसके अलावा यू वी अंतरिक्ष उपकरण का उगयोग कर सौर क्रोमोस्पियर पर विचार दे सकता है, एक्सरे उपकरणों के प्रयोग द्वारा धधक (फ्लेयर) पर प्रेषण प्रस्तुत कर सकता है। अणु ससूंचक तथा मेगनोमीटर अंतरिक्ष उपकरण आवेशित अणुओं तथा एल-1 के इर्द-गिर्द हालो कक्षा में पहुंचने वाले चुंबकीय क्षेत्र के संबंध में सूचना प्रदान कर सकता है।

यह सूचना केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राज्य मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, जनशिकायत एवं पेंशन, आणविक ऊर्जा तथा अंतरिक्ष डॉ जितेन्द्र सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : वर्षांत समीक्षा-2017

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : वर्षांत समीक्षा-2017
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उर्वरक विभाग
यूरिया मूल्य निर्धारण नीति – 2015: नई यूरिया नीति-2015 को 25 मई, 2015 को अधिसूचित किया गया था। इसके उद्देश्य ये रहे हैं:
  • स्वदेशी यूरिया उत्पादन को अधिकतम स्तर पर पहुंचाना
  • यूरिया इकाइयों की ऊर्जा दक्षता बढ़ाना
  • भारत सरकार पर सब्सिडी बोझ को तर्कसंगत करना
  • लागत से अधिक अवधारणा पर आधारित पुनर्आकलित क्षमता (आरएसी) तक रियायत आधारित मूल्य निर्धारण। एनसीयू के लिए एमआरपी कुल मिलाकर 5360 रुपये प्रति मीट्रिक टन जमा (प्लस) एमआरपी का 5 प्रतिशत तय की गई।
 50 किलो की मौजूदा बोरी के स्थान पर 45 किलो की यूरिया बोरी का चलन शुरू : इसके लिए 4 सितम्बर, 2017 को जारी अधिसूचना देखें। सरकार ने 50 किलो की मौजूदा बोरी के स्थान पर 45 किलो की यूरिया बोरी का चलन शुरू करने का निर्णय लिया है।

नई निवेश नीति : नई निवेश नीति (एनआईपी) के प्रावधानों के तहत, इसके संशोधनों के साथ पढ़ें, मैटिक्स फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (मैटिक्स) ने पश्चिम बंगाल स्थित पानागढ़ में एक सीबीएम आधारित नया अमोनिया-यूरिया परिसर स्थापित किया है, जिसकी वार्षिक स्थापित क्षमता 1.3 एमएमटी है। मैटिक्स का वाणिज्यिक उत्पादन 1 अक्टूबर, 2017 को शुरू हो गया है।

फास्फेटिक और पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों की दरों में कमी : विभाग ने उर्वरक कम्पनियों को पी एंड के उर्वरकों की दरें घटाने के लिए उत्साहित किया था, जिससे जून, 2016 से प्रति 50 किलो डीएपी, एमओपी और जटिल उर्वरकों की एमआरपी में क्रमशः 125, 250 तथा 50 रुपये की कमी आई। दिसम्बर, 2016 से प्रति 50 किलो डीएपी की कीमत 65 रुपये और घट गई है।

गोरखपुर, सिन्दरी और बरौनी इकाइयों की मौजूदा स्थिति कुछ इस प्रकार है : परियोजना पूर्ण गतिविधियां प्रगति पर हैं। इन तीनों परियोजनाओं के सन्दर्भ में निम्नलिखित परियोजना-पूर्व गतिविधियां पूरी हो गई हैं :
  1. संभाव्यता-पूर्व
  2. भू-तकनीकी जांच और स्थलाकृतिक अध्ययन
उपर्युक्त तीनों परियोजनाओं में अक्टूबर, 2020 तक उत्पादन शुरू होने की आशा है।
मॉडल उर्वरक खुदरा दुकान :
  • बजट 2016-17 में अगले तीन वर्षों के दौरान 2000 मॉडल उर्वरक खुदरा दुकानें खोलने की घोषणा की गई थी।
  • इन दुकानों में उचित दरों पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की बिक्री करने, मृदा परीक्षण, बीज परीक्षण, पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने जैसी अनिवार्य सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी।
  • इन दुकानों में विभिन्न उपकरणों जैसे ट्रैक्टर, लेजर लेवलर, रोटावेटर, फसल कटाई मशीन एवं थ्रेसर और छिड़कने वाले यंत्रों के साथ-साथ कुदाल और हंसिया जैसे छोटे उपकरणों को भी किराये पर देने जैसी कुछ वैकल्पिक सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी।

मई 2017 तक 2000 मॉडल उर्वरक खुदरा दुकानें खोली जा चुकी हैं।



फार्मास्यूटिकल विभाग

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)
  • 1 जनवरी, 2017 से लेकर 18 दिसम्बर, 2017 तक की अवधि के दौरान 3019 पीएमबीजेपी केन्द्र चालू कर दिए गए हैं। इस योजना के उत्पाद बास्केट का विस्तारीकरण कर इसमें 652 दवाओं और 154 सर्जिकल एवं उपभोग्य पदार्थों को शामिल कर लिया गया है, जिनमें सभी चिकित्सीय श्रेणियां जैसे कि संक्रमण रोधी, मधुमेह रोधी, हृदय रोग संबंधी, कैंसर रोधी, जठरांत्र दवाओं इत्यादि को कवर किया गया है।
  • देश भर में पीएमबीजेपी केन्द्र खोलने को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न राज्य सरकारों/संगठनों/गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ हस्ताक्षर किए गए हैं। 2 नवंबर, 2017 तक विभिन्न व्यक्तियों की ओर से 36564 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से सभी को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है।
 राष्ट्रीय फार्मा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर) : छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान में एक-एक नाइपर की स्थापना संबंधी सरकारी घोषणा के बाद इन तीन राज्यों की सरकारें नाइपर खोलने के लिए क्रमशः झालावाड़, रायपुर और नागपुर में भूमि मुहैया कराने पर सहमत हो गई हैं।


रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग
असम गैस क्रैकर परियोजना (एजीसीपी)
केन्द्र सरकार, अखिल असम छात्र संघ (आसू) और अखिल असम गण संग्राम परिषद (एएजीपी) के बीच हस्ताक्षरित सहमति पत्र को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त, 1985 को असम गैस क्रैकर परियोजना पर पहल की गई, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास करना है। 2 जनवरी, 2016 को इस परियोजना की शुरुआत की गई और 5 फरवरी, 2016 को डिब्रूगढ़ के लेपेतकाता स्थित बीसीपीएल परिसर में भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसे राष्ट्र को समर्पित किया गया। परियोजना से संबंधित संयंत्र में लगभग 700 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार और परियोजना परिसर के अंदर लगभग 1500 लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र स्थित डाउनस्ट्रीम रसायन एवं पेट्रोरसायन उद्योग को बीसीपीएल से कच्चा माल प्राप्त होगा और पूर्वोत्तर क्षेत्र में अनेक डाउनस्ट्रीम प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योगों तथा सहायक इकाइयों की स्थापना के जरिये लगभग 1 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजित होने की आशा है।

इस संयंत्र में फिलहाल स्थिरीकरण प्रक्रिया जारी है और अन्य उप-उत्पादों के अलावा पॉलीइथिलीन की 2,20,000 टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता तथा पॉलीप्रॉपिलीन की 60,000 टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता के सापेक्ष बीसीपीएल ने वर्ष 2016-17 के दौरान लगभग 1,00,000 टन पॉलीमर का उत्पादन किया है।

हिन्दुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल्स लिमिटेड (एचओसीएल)

भारत सरकार/सीसीईए ने 17 मई, 2017 को एचओसीएल की पुनर्गठन योजना को मंजूरी दी है, जिसमें डाई-नाइट्रोजन टेट्रोऑक्साइड (एन24) संयंत्र को छोड़कर एचओसीएल की रसायनी यूनिट के समस्त गैर-लाभप्रद संयंत्रों के परिचालनों को बंद करना शामिल है। एन24 संयंत्र को ‘जैसा भी है, जहां भी है’ के आधार पर इसरो को स्थानांतरित करना तय किया गया।

इस पुनर्गठन योजना को क्रियान्वित करने के लिए विभाग/एचओसीएल द्वारा आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। एन24 संयंत्र को छोड़कर रसायन यूनिट स्थित सभी संयंत्रों को बन्द कर दिया गया है। वहीं, एन24 संयंत्र को 1 अक्टूबर, 2017 को इसरो को हस्तांतरित कर दिया गया है।




वर्षांत समीक्षाः वर्ष 2017 के दौरान खेल विभाग की उपलब्धियां एवं पहल

वर्षांत समीक्षाः वर्ष 2017 के दौरान खेल विभाग की उपलब्धियां एवं पहल

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22वीं एशियाई एथेलेटिक स्पर्धा, 2017 का सफल आयोजनः


भारत ने 6 से 9 जुलाई 2017 के बीच उड़ीसा के भुवनेश्वर में बाईसवीं एशियाई एथलेटिक चैंपियनशिप, 2017 का सफल आयोजन भी किया। भारत पदक तालिका में 29 पदक (12 स्वर्ण, 5 रजत, 12 कांस्य) जीत कर पहले स्थान पर रहा।


खेलों में भारत ऑस्ट्रेलिया के बीच भागीदारी: ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मेलकॉम टर्नबुल की भारत यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया की सरकारों के मध्य 10 अप्रैल, 2017 को नई दिल्ली में दोनों देशों के खेल संबंधों में सुधार हेतु पांच समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर हुए थे।


इसके अलावा भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मुम्बई में खेलों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 12 अप्रैल, 2017 को साझेदारी शुरू की। इस साझेदारी से चार क्षेत्रों- एथलीट/ कोच प्रशिक्षण एवं विकास, खेल विज्ञान, खेलों की शासन प्रणाली एवं सम्पूर्णता एवं साधारण-जनों की भागीदारी- में भारत ऑस्ट्रेलिया सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।



फीफा अंडर-17 विश्व कप का सफल संचालन
फीफा अंडर-17 विश्व कप के सत्रहवें संस्करण का सफल आयोजन 6 से 28 अक्टूबर, 2017 के बीच हुआ। भारत ने पहली बार इतिहास में इतनी बड़ी फुटबॉल प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया। स्पर्धा के स्थल यह थे- जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली, पीजेएन स्टेडियम, फटोरदा- गोआ, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, कोचि, इंदिरा गांधी एथेलेटिक्स स्टेडियम- गुवाहाटी, विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन, साल्ट लेक- कोलकाता, डीवाई पाटिल स्टेडियम, नवी मुंबई । दुनिया भर की 24 टीमों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। दर्शकों से अटे युवा भारती क्रीड़ांगन, साल्ट लेक- कोलकाता में 28 अक्टूबर, 2017 को इंग्लैंड और स्पेन के बीच फाइनल मैच खेला गया जिसमें इंग्लैंड फीफा अंडर-17 विश्व कप प्रतिस्पर्धा का विजेता घोषित किया गया।


मिशन इलेवन मिलियन
मिशन इलेवन मिलियन फुटबॉल को देश भर में लोकप्रिय बनाने के लिये मंत्रालय, ऑल इण्डिया फुटबॉल फेडेरेशन एवं फीफा का एक संयुक्त कार्यक्रम है। कार्यक्रम का लक्ष्य फुटबॉल के प्रोत्साहन के लिये 30 सितम्बर, 2017 तक 11 मिलियन लड़कों और लड़कियों तक पहुंचना है। भारत सरकार ने कार्यक्रम हेतु 12.55 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं एवं इतनी ही धनराशि एआईएफएफ/ फीफा द्वारा व्यय की जाएगी। उपरोक्त कार्यक्रम के लिये 11 मिलियन बच्चों को पहले ही कवर किया जा चुका है। कार्यक्रम ने देश भर में फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 


राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय, मणिपुरः राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय, मणिपुर की स्थापना का प्रस्ताव औपचारिक तौर पर वित्त मंत्री ने 10 जुलाई 2014 को अपने बजट भाषण (2014-2015) में कर दिया था। नीति आयोग ने इस परियोजना को सिद्धांतः अपनी अनुमति प्रदान कर दी है। केंद्र की यह नई परियोजना पांच साल में कार्यान्वित हो जाएगी। परियोजना की अनुमानित लागत 500 करोड़ रुपये होगी। प्रस्तावित खेल विश्वविद्यालय का प्रशिक्षण कार्यक्रम चार स्कूलों के अंतर्गत किया जाएगाः खेल विज्ञान एवं खेल चिकित्सा विद्यालय, केल प्रबंधन एवं तकनीक विद्यालय, खेलकूद शिक्षा विद्यालय एवं  अंतर्विषयक अध्ययन विद्यालय। चारों विद्यालयों के अंतर्गत कुल तेरह विभाग होंगे।  
  
मणिपुर सरकार ने युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय को प्रस्तावित विश्वविद्यालय के निर्माण के लिये दिनांक 29 दिसंबर 2016 को राज्य के पश्चिमी इम्फाल जनपद में 325.90 एकड़ भूमि प्रदान की है। विश्वविद्यालय की स्थापना के लिये परियोजना का प्रबंधन-सलाहकार हिंदुस्तान स्टीलवर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (एचएससीएल) है।


प्रस्तावित विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना सुनिश्चित करने के लिये कैनबरा एवं विक्टोरिया विश्वविद्यालय के साथ युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने अप्रैल, 2017 में समझौता-पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं। राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय बिल के फाइनल होने तक मणिपुर सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1989 के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय सोसाइटी विधेयक के पारित होने तक बतौर विश्वविद्यालय का कार्य करेगी। बीपीईएस एवं बीएससी (स्पोर्ट्स कोचिंग) पाठ्यक्रम खुमन लम्पक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, जो राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय सोसाइटी का मुख्यालय होगा, से शुरू होंगे। प्रारंभ में दोनों पाठ्यक्रमों के लिये 60-60 छात्रों को लिये जाने की योजना है। पाठ्यक्रमों के संचालन के लिये 16 प्राध्यापकों के अलावा एक ओएसडी एवं एक वित्त अधिकारी की नियुक्ति प्रस्तावित की गई है।

Estimates of Gross Domestic Product (GDP), Net Domestic Product (NDP) and National Income, measured as Net National Income (NNI)

Press Information Bureau  Government of India Ministry of Statistics & Programme Implementation 03-August-2017 Gross Domesti...