Monday, 8 January 2018

भारत के लिए मिथनोल अर्थव्यवस्थाः ऊर्जा सुरक्षा, मेक इन इंडिया तथा शून्य कार्बन प्रभाव

भारत के लिए मिथनोल अर्थव्यवस्थाः ऊर्जा सुरक्षा, मेक इन इंडिया तथा शून्य कार्बन प्रभाव


http://pib.nic.in/newsite/PrintHindiRelease.aspx?relid=69893

केंद्रीय सड़क परिवहन तथा राजमार्ग, शीपिंग, जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा संरक्षण मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज लोक सभा में मेथनोल पर एक वक्तव्य दिया। भारत में मेथनोल अर्थव्यवस्था पर नोट इस प्रकार हैः
भारत को वर्तमान में प्रतिवर्ष 2900 करोड़ लीटर पेट्रोल और 9000 करोड़ लीटर डीजल की आवश्‍यकता है, भारत विश्‍व में छठा बड़ा उपभोक्‍ता है यह खपत वर्ष 2030 तक दोगुनी हो जाएगी और भारत तीसरा बड़ा उपभोक्‍ता बन जाएगा। कच्चे तेल के लिए हमारा आयात बिल लगभग 6 लाख करोड़ रुपये है।
हाइड्रोकार्बन ईंधन ने ग्रीन हाउस गैस उत्‍सर्जन (जीएचजी) सहित पर्यावरण को भी विपरीत रूप से प्रभावित किया है। भारत विश्‍व में तीसरा बड़ा ऊर्जा संबंधी कार्बन डाइ आक्‍साइड उत्‍सर्जक देश है। दिल्‍ली जैसे शहरों में लगभग 30% प्रदूषण ऑटोमोबाइल से है और सड़कों पर ऑटोमोबाइलों की बढ़ती संख्‍या प्रदूषण को और विकृत कर रही है। यह अवश्‍य ध्यान दिया जाना चाहिए कि हाल की स्‍थिति गंभीर है और अब सरकार के लिए देश में शहरी प्रदूषण को कम करने के लिए विस्‍तृत योजना (रोड मैप) प्रस्‍तुत करने और प्रदूषण संबंधी मौतों को पूरी तरह से रोकने का समय आ गया है।
प्रधानमंत्री ने हमारे देश के समक्ष वर्ष 2022 तक आयात बिल को 10% तक कम करने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। कच्‍चा तेल आयात हमारी विदेशी मुद्रा को खाली कर रहा है, हमारी मुद्रा पर अत्‍यधिक दबाव डाल रहा है और इस प्रकार शेष विश्‍व के साथ हमारी मोल-भाव की शक्‍ति को कम कर रहा है। हमें अपने स्‍वयं का ‘‘वैश्‍विक संदर्भ का भारतीय ईंधन’’ बनाने की आवश्‍यकता है।
मेथनोल ही क्‍यों?
मेथनोल ईंधन में विशुद्ध ज्‍वलन कण है जो परिवहन में पेट्रोल और डीजल दोनों का और रसोई ईंधन में एलपीजी, लकड़ी, मिट्टी तेल का स्थान ले सकता है। यह रेलवे, समुद्री क्षेत्र, जेनसेट्स, पावर जेनरेशन में डीजल को भी प्रतिस्‍थापित कर सकता है और मेथनोल आधारित संशोधक हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए आदर्श पूरक हो सकते हैं। मेथनोल अर्थव्‍यवस्‍था संपूर्ण हाइड्राजेन आधारित ईंधन प्रणालियों के सपने के लिए सेतु है।
मेथनोल सभी आंतरिक दहन ईंजनों में प्रभावशाली रूप से जलती है, कोई पार्टिकुलेट मैटर नहीं पैदा करती, कोई कालिख नहीं होती, लगभग शून्‍य एसओएक्‍स और एनओएक्‍स उत्‍सर्जन (लगभग शून्‍य प्रदूषण) होता है। मेथनोल का गैसीय रूप-डीएमई को एलपीजी के साथ मिलाया जा सकता है और यह बड़ी बसों और ट्रकों में डीजल के लिए बेहतर पर्याय हो सकता है।
पेट्रोल में मेथनोल 15 (एम 15) प्रदूषण को 33% तक कम करेगा और मेथनोल द्वारा डीजल प्रतिस्‍थान 80% से अधिक प्रदूषण कम करेगा।
मेथनोल को प्राकृतिक गैस, इंडियन हाई ऐश कोल, बायो-मास, एमएसडब्‍ल्‍यू,  स्‍ट्रैंडेड और फ्लेर्ड गैसों से बनाया जा सकता है और भारतीय कोयले और सभी अन्‍य फीडस्‍टोक से 19 रु. प्रति लीटर की दर से मेथनोल के उत्‍पादन (उचित प्रौद्योगिकी संयोजन के माध्‍यम से) को प्राप्‍त किया जा सकता है। विश्‍व का बेहतर हिस्‍सा कार्बन डाइआक्‍साइड से नवीकरणीय मेथनोल की दिशा में पहले ही जा रहा है और कार्बन डाइआक्‍साइड से मेथनोल का निरंतर रीसाइकिलिंग अर्थात स्‍टील प्‍लांटों से उत्‍सर्जित कार्बन डाइआक्‍साइड, जियोथर्मल एनर्जी अथवा कार्बन डाइआक्‍साइड का कोई अन्‍य स्रोत, प्रभावी रूप से हवा से मेथनोल
मेथनोल के लिए विश्‍व परिदृश्‍य:
पिछले कुछ वर्षों के दौरान, ईंधन के रूप में मेथनोल और डीएमई का उपयोग काफी बढ़ा है। मेथनोल मांग काफी रूप से सालाना 6 से 8% तक बढ़ रही है। विश्‍व ने मेथनोल की 120 एमटी की क्षमता संस्‍थापित की है और यह वर्ष 2025 तक लगभग 200 एमटी हो जाएगी। 
वर्तमान में मेथनोल चीन में परिवहन ईंधन का लगभग 9 प्रतिशत है। चीन ने लाखों वाहनों को मेथनोल पर चलने के लिए बदला है। अकेला चीन विश्‍व मेथनोल का 65 प्रतिशत का उत्‍पादन करता है और वह मेथनोल पैदा करने के लिए अपने कोयले का इस्‍तेमाल करता है। इजरायल, इटली ने पेट्रोल के साथ मेथनोल के 15 प्रतिशत के मिश्रण कार्यक्रम को अपनाया है और यह तेजी से एम 85 और एम 100 की ओर बढ़ रहा है। जापान, कोरिया मेथनोल और डीएमई का काफी उपयोग कर रहे हैं और आस्‍ट्रेलिया ने जीईएम ईंधन (गैसोलीन, एथेनॉल और मेथनोल अपानाया है और लगभग 56 प्रतिशत मेथनोल को मिश्रित करते हैं। मेथनोल विश्‍व भर में समुद्री क्षेत्र में ईंधन की पसंद बन गया है और स्‍वीडन जैसे देश इसके उपयोग में सबसे आगे हैं। 1500 से ज्यादा लोगों को ढोने वाले बड़े यात्री जहाज पहले ही 100 प्रतिशत मेथनोल पर चल रहे हैं। 11 अफ्रीकी और कई कैरेबियन देशों ने मेथनोल रसोई ईंधन को अपनाया है और पूरे विश्‍व में जेनसेट और औद्योगिक बॉयलर डीजल की बजाए मेथनोल पर चल रहे हैं।
वातावरण से कार्बन डाईआक्‍साइड से वापस पकड़कर नवीकरणीय मेथनोल काफी प्रसिद्ध हो रहा है और विश्‍व द्वारा इसे मानवता के लिए जाने जाना वाला स्‍थायी ईंधन समाधान के रूप में देखा जाता है। विश्‍व भर में शहरी जनसंख्‍या की ज्‍वलन समस्‍या के लिए मेथनोल एक महत्‍वपूर्ण समाधान है। 
भारत क्‍या कर सकता है?
भारत ने 2 एमटी प्रतिवर्ष की मेथनोल उत्‍पादन क्षमता संस्‍थापित की है। नीति आयोग द्वारा तैयार की गई योजना के अनुसार इंडियन हाई ऐश कोल, स्‍ट्रैंडेड गैस और बायो-मास का उपयोग करके वर्ष 2025 तक वार्षिक रूप से 20 एमटी मेथनोल का उत्‍पादन कर सकता है। भारत में जिसके पास 125 बिलियन टन का प्रमाणित कोल रिजर्व है और जो प्रतिवर्ष 500 मिलियन टन बायो-मास पैदा करता है और जिसके पास स्‍ट्रैंडेड और फ्लेर्ड गैसों की बहुत अधिक मात्रा है, वैकल्‍पिक फीडस्‍टोक और ईंधनों के आधार पर ईंधन सुरक्षा सुनिश्‍चित करने की बहुत अधिक संभावना है।
नीति आयोग ने वर्ष 2030 तक अकेले मेथनोल द्वारा 10 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात के प्रतिस्थापन के लिए एक योजना (रोड मैप) तैयार की है। इसके लिए लगभग 30 एमटी मेथनोल की आवश्‍यकता होगी। मेथनोल और डीएमई पेट्रोल और डीजल से काफी हद तक सस्‍ते हैं और भारत वर्ष 2030 तक अपना ईंधन बिल 30 प्रतिशत तक कम करने की ओर देख सकता है।
मेथनोल अर्थव्‍यवस्‍था के लिए नीति आयोग की योजना (रोड मैप) में निम्‍नलिखित शामिल हैं:-
  • देशी प्रौद्योगिकी से इंडियन हाई ऐश कोल से बड़ी मात्रा में मेथनोल का उत्‍पादन और क्षेत्रीय उत्‍पादन कार्य-नीतियों को अपनाना और बड़ी मात्रा में 19 रुपये प्रति लीटर की दर से मेथनोल का उत्‍पादन। भारत कोयले के उपयोग को पूर्णत: पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए और सीओपी 21 के प्रति हमारी प्रतिबद्धताओं के लिए कार्बन डाइआक्‍साइड को पकड़ने की प्रौद्योगिकी को अपनाएगा।
  • मेथनोल उत्‍पादन के लिए बायो-मास, स्‍ट्रैंडेड गैस और एमएसडब्‍ल्‍यू। लगभग 40% मेथनोल उत्‍पादन इन फीडस्‍टोकों से हो सकता है। 
  • मेथनोल और डीएमई का परिवहन - रेल, सड़क, समुद्री और रक्षा में मेथनोल का उपयोग। औद्योगिक बॉयलर, डीजल जेनसेट्स और पावर जेनरेशन और मोबाइल टावर अन्‍य अनुप्रयोग हैं।
  • मेथनोल और डीएमई का घरेलू रसोई ईंधन – रसोई स्टोव के रूप में उपयोग। एलपीजी = डीएमई मिश्रण कार्यक्रम।
  • मैरीन, जेनसेट्स और परिवहन में फ्यूल सेल एप्‍लीकेशंस में मेथनोल का उपयोग।
      
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वीके/ऐजी/एस/डीके – 6122



अंतर्देशीय जल मार्गों के माध्यम से पूर्वोत्तर में व्यवसाय और रोजगार अवसरों के लिए नए स्थान खोलना

अंतर्देशीय जल मार्गों के माध्यम से पूर्वोत्तर में व्यवसाय और रोजगार अवसरों के लिए नए स्थान खोलना

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ब्रह्मपुत्र नदी पर राष्ट्रीय जल मार्ग 2 के माध्यम से नियमित कार्गो परिवहन का उद्घाटन


राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम, 2016 के तहत, 2016 में अधिसूचित 106 नए राष्ट्रीय जलमार्गों में से 19 जलमार्ग  एनईआर में हैं। इनमें से कुछ एन डब्ल्यू -16 (नदी बराक), एनडब्ल्यू -95 (नदी सुबनसिरी), एन डब्ल्यू -39 (नदी गणोल), एनडब्ल्यू -93 (नदी सिमसंग), एनडब्ल्यू -101 (नदी तिज़ू और जुंग्की), एनडब्ल्यू -31 (धनसिरी), एनडब्ल्यू -62 (नदी लोहित), एनडब्ल्यू -106 (नदी उमगोट), एनडब्ल्यू -18 (बेकी नदी) प्रमुख हैं। 

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सरकार ने आभासी ‘मुद्रा’ में निवेश के खिलाफ लोगों को आगाह किया; कहा कि आभासी मुद्रा पोंजी स्‍कीमों की तरह है

सरकार ने आभासी ‘मुद्रा’ में निवेश के खिलाफ लोगों को आगाह किया; कहा कि आभासी मुद्रा पोंजी स्‍कीमों की तरह है 
http://pib.nic.in/newsite/PrintHindiRelease.aspx?relid=69916

 सरकार ने आभासी ‘मुद्रा’ में निवेश के खिलाफ लोगों को आगाह किया; कहा कि आभासी मुद्रा पोंजी स्‍कीमों की तरह है
वित्‍त मंत्रालय ने आज आभासी ‘मुद्रा’ के बारे में एक बयान दिया है।
‘‘भारत और पूरी दुनिया में बिटक्‍वाइन सहित आभासी ‘मुद्रा’ की कीमतों में हाल में अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखी गई है। आभासी मुद्राओं का अपना कोई मूल्‍य नहीं होता और न वे किसी परिसम्‍पत्तियों पर आधारित होती हैं। बिटक्‍वाइन और अन्‍य आभासी मुद्राओं पर सट्टेबाजी होती है, जिससे उनकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आता है। पोंजी स्‍कीमों की तरह आभासी मुद्रा में भी निवेश का बहुत जोखिम होता है, जिसके कारण निवेशकों को कभी भी अचानक नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्‍योंकि यह पानी के बुलबुले की तरह होता है। खासतौर से खुदरा उपभोक्‍ता अपनी गाढ़ी कमाई खो बैठता है। उपभोक्‍ताओं को सजग और बहुत सावधान रहने की आवश्‍यकता है, ताकि वे इस तरह की पोंजी स्‍कीमों के झांसे में न आयें। आभासी मुद्रायें डिजिटल/इलेक्‍ट्रॉनिक रूप में होती हैं और हमेशा हैकिंग, पासवर्ड, साइबर हमले जैसे खतरे मंडराते रहते हैं। इसके परिणामस्‍वरूप जमा पूंजी हमेशा के लिए नष्‍ट हो जाती है। आभासी मुद्रा का लेन-देन एनक्रिप्‍टेड होता है, जिसके कारण गैर-कानूनी और विध्‍वंसक गतिविधियां चलाने में आसानी होती है। इनके जरिये आतंकवाद का वित्‍तपोषण, तस्‍करी, नशीले पदार्थों की तस्‍करी और धन शोधन जैसी गतिविधियां चलाई जा सकती हैं।
आभासी मुद्रा को सरकार का कोई समर्थन प्राप्‍त नहीं है। इनमें कानूनी तौर पर कोई लेन-देन भी नहीं किया जा सकता, इसलिए आभासी मुद्रायें ‘मुद्रा’ के दायरे में नहीं आतीं। इनका उल्‍लेख ‘सिक्‍कों’ के रूप में भी किया जा रहा है, जबकि ये चलन वाले सिक्‍के नहीं हैं। इस आधार पर आभासी मुद्रा न तो सिक्‍का है और न मुद्रा। भारत सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक ने आभासी मुद्रा को लेन-देन के लिए अधिकृत नहीं किया है। सरकार या भारत में किसी भी प्राधिकार ने किसी भी एजेंसी को ऐसी मुद्रा के लिए लाइसेंस नहीं दिया है, इसलिए जो व्‍यक्ति आभासी मुद्रा में लेन-देन करता है, उसे इसके जोखिम के प्रति सावधान रहना चाहिए।
आभासी मुद्रा को इस्‍तेमाल करने वालों और उनके कारोबार में संलग्‍न लोगों को दिसम्‍बर, 2013, फरवरी 2017 और दिसम्‍बर 2017 में भारतीय रिजर्व बैंक ने सावधान किया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा था कि यह आभासी मुद्रायें वित्‍तीय, वैधानिक और सुरक्षा संबंधी मामलों के लिए खतरनाक हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने यह भी स्‍पष्‍ट किया था कि उसने बिटक्‍वाइन या किसी भी अन्‍य आभासी मुद्रा के लेन-देन और संचालन के संबंध में किसी भी कंपनी या एजेंसी को न तो लाइसेंस दिया है और न उन्‍हें अधिकृत किया है। भारत सरकार ने यह भी स्‍पष्‍ट कर दिया है कि आभासी मुद्रायें लेन-देन के लिए किसी भी प्रकार वैधानिक नहीं है और उन्‍हें कोई भी कानूनी अनुमति नहीं दी गई है। आभासी मुद्राओं में निवेश करने वाले और अन्‍य भागीदार अपने जोखिम पर लेन-देन करते हैं और सबसे अच्‍छा तरीका यही है कि इस प्रकार के किसी भी लेन-देन से बचा जाए।’’
वीके/एकेपी/जीआरएस-6136        


वर्षांत समीक्षा 2017- जनजातीय कार्य मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा 2017- जनजातीय कार्य मंत्रालय

http://pib.nic.in/newsite/PrintHindiRelease.aspx?relid=69932

32 केन्द्रीय मंत्रालय और विभाग ‘ट्राइबल सब प्लान’ की धनराशि को देख रहे हैं जो जनजातियों की विभिन्न 273 योजनाओं के लिए आबंटित है | सरकार का ABR ने जनवरी 2016 मेंइस मंत्रालय को यह निर्देश दियाथा कि वह‘ट्राइबल सब प्लान’ के अंतर्गत दी जाने वाली धनराशि की देखरेख करे जिसे नीति आयोग ने तैयार किया है | इसकी देखरेख के लिए एक ऑनलाइन सिस्टम भी बने गया है जिसका लिंक stcmis.nic.in.है| यह ढांचा जनजातियों के कल्याण की योजनाओं, प्रदर्शन, और परिणाम की भी जांच करता है| साथ ही क्षेत्र आधारित प्रदर्शन की जांच करता है जिससे जिम्मेदारी का निर्धारण किया जा सके | इसके लिए एक नोडल ऑफिसर नियुक्त किया गया है जोमंत्रालय के साथ संपर्क बनाए रहता है | इस पूरे कार्यक्रम को छमाही समीक्षा के अंतर्गत मंत्रालय और नीति आयोग देखेंगे जिसके आधार पर इसके प्रदर्शन का आकलन किया जायेगा |


  1. आदि महोत्सव : 
जनजातिकार्य मंत्रालय ने ट्रिफेड (TRIFED) के सहयोग से एक राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव का आयोजन 16 नवम्बर 2017 से 30 नवम्बर 2017 तक किया | इस महोत्सव की शुरुआत महान आदिवासी जन नेता और स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के 142वें जन्मदिवस पर अखबारोंएवं सोशल मीडिया मेंएक विज्ञापन देकर श्रद्धांजलि दी गई | आदि महोत्सव का उदघाटन उप-राष्ट्रपति ने 16 नवम्बर के दिन किया | आदिवासी संस्कृति कला, शिल्प, खानपान और व्यवसाय का यह महोत्सव दिल्ली में 15 दिन तक लाखों दिल्लीवासियों के बीच मनाया गया | यहाँ आदिवासी कलाकारों की बेहतरीन शिल्प कला का नज़ारा दिखा | इसमें सुन्दर साड़ियाँ, ड्रेस मटिरिअल, आभूषण, बांस और सरकंडे से बनी बस्तुओं, पेंटिंग जैसी कई चीज़ें शामिल थी | 27 राज्यों से आए करीब 800 कलाकार और कारीगरों ने इसमें भाग लिया और अपने उत्पाद बेचे | इसी बीच आदिबासी नृत्य और लोकसंगीत की भी कई प्रस्तुतियां दी गईं लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान 85 आदिवासी रसोइयों के हाथों बनी स्वादिष्ट व्यंजनों ने खींचा| इसमें तेलंगाना से बंजारा बिरयानी, ओडिशा से खोदियार रोटी और चिकन के साथ उत्तर पूर्व के राज्यों से कई स्वादिष्ट शाकाहारी और मासाहारी व्यंजन शामिल थे |दिल्ली के लोगों ने इन सब चीज़ों का लुत्फ़ उठाया| 15 दिन के मेले में आदिवासी कारीगरों ने करीब 1.60 करोड़ की बिक्री की जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है | इस महोत्सव में कुल बिक्री 4.10 करोड़ की हुई जिसे लेकर पूरा आदिवासी समूह उत्साहित था |

लघु वन उत्पाद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य :
      साल 2013-14 में इस योजना की शुरुआत 10 लघु वन उत्पादों के लिए हुई थी जिसमें बाद में 31.10.16 को बदलाव किए गए साथ ही अन्य कई उपादों को इस श्रेणी में जोड़ा गया और इसे देश भर में लागू करने को स्वीकृति दी गई | इससे पहले यह योजना पांचवी अनुसूची वाले राज्यों में ही लागू थी |इसी तरह जिन 10 वस्तुओं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य शुरू से था ट्रिफेडने  टेरी के सहयोग से किए गए शोध  के बाद इनपर पुनर्विचार किया | साल के बीज, सालकी पत्तियाँ, बीज के साथ चिरौंजी पौध, रंगीनी लाख और कुसुमी लाख जैसे पांच उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य नवम्बर 2017 में बढाए गए | 


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वित्तीय समाधान और जमा बीमा (एफआरडीआई) विधेयक, 2017 (FRDI)

  
वित्तीय समाधान और जमा बीमा (एफआरडीआई) विधेयक, 2017 का उद्देश्‍य जमाकर्ताओं के मौजूदा अधिकारों को संरक्षित करना एवं बढ़ाना और वित्तीय कंपनियों के लिए एक व्यापक व दक्ष समाधान व्यवस्था लाने की कोशिश करना है

वित्तीय समाधान और जमा बीमा विधेयक, 2017 के लिए दलील
वर्तमान में भारत में वित्तीय कंपनियों के परिसमापन सहित समाधान के लिए कोई भी व्यापक और एकीकृत कानूनी ढांचा या रूपरेखा नहीं है।
वित्तीय सेवाप्रदाताओं से जुड़े मसलों के समाधान के लिए अधिकार और जिम्मेदारियां विभिन्‍न कानूनों के तहत नियामकों, सरकार और न्यायालयों को दी जाती हैं, जिससे विशिष्‍ट समाधान क्षमताओं का विकास नहीं हो पाता है। यही नहीं, छितरी हुई भूमिका की इस परिभाषा के कारण वित्तीय समूहों से जुड़े मसलों का समाधान कठिन हो जाता है।
संबंधित कानूनों के तहत वर्तमान में उपलब्ध समाधान संबंधी उपाय अत्‍यंत सीमित हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को बैंकों, भारत स्थित विदेशी बैंकों की शाखाओं और सहकारी बैंकों के संबंध में कुछ विशेष समाधान उपाय करने का अधिकार है। हालांकि, समाधान से जुड़े ये अधिकार काफी सीमित हैं। आरबीआई या तो बैंक प्रबंधन में बदलाव ला सकता है या अधिस्थगन लागू कर सकता है और अनिवार्य विलय की सिफारिश कर सकता है। किसी बैंक के मामले में आम तौर पर समाधान के दो तरीकों में से किसी भी एक तरीके का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत एक कमजोर बैंक का दूसरे बैंक में विलय या एकीकरण किया जाता है अथवा संबंधित बैंक का परिसमापन किया जाता है। इस दिशा में अन्य समाधान उपाय उपलब्ध नहीं हैं।
केंद्र सरकार के पास सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के पुनर्गठन का अधिकार है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को केवल उच्च न्यायालयों द्वारा या तो स्वेच्छा से या भारतीय रिजर्व बैंक के आवेदन पर कानूनन बंद अथवा परिसमापन किया जा सकता है। बीमा कंपनियों, वित्तीय बाजार के बुनियादी ढांचे और अन्य वित्तीय सेवा प्रदाताओं से जुड़ी समाधान व्‍यवस्‍थाएं भी काफी अपर्याप्त हैं। विशेषकर निजी वित्तीय कंपनियों के व्‍यापक विस्तार को ध्‍यान में रखते हुए निजी क्षेत्र की वित्तीय कंपनियों के लिए वर्तमान समाधान व्‍यवस्‍था अनुपयुक्‍त है। दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, 2016 ने देश में मुख्य रूप से गैर-वित्तीय कंपनियों के लिए एक व्यापक समाधान व्‍यवस्‍था कायम की है। हालांकि, देश में वित्तीय कंपनियों के लिए इस तरह की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
वित्तीय समाधान और जमा बीमा विधेयक, 2017 (एफआरडीआई विधेयक) एक व्यापक समाधान व्‍यवस्‍था प्रदान करके मौजूदा समाधान व्यवस्था का स्‍थान लेगा जो किसी वित्तीय सेवा प्रदाता के विफल या दिवालिया होने की दुर्लभ स्थिति में जमाकर्ताओं के हित में एक त्‍वरित, व्यवस्थित और दक्ष समाधान व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
वित्तीय सेवा प्रदाताओं के फेल या दिवालिया होने का अत्‍यंत व्यापक प्रभाव पड़ता है और संबंधित देश की अर्थव्यवस्था एवं वित्तीय स्थिरता पर इसका प्रणालीगत असर हो सकता है। वहीं, पारंपरिक दिवाला संबंधी घटना होने पर प्रभावित पक्ष मुख्‍यत: दिवालिया होने वाली संस्था के ऋणदाताओं तक ही सीमित होते हैं।
एफआरडीआई विधेयक में एक समाधान निगम बनाने और एक व्यापक समाधान व्यवस्था कायम करने का प्रस्ताव किया गया है ताकि किसी वित्तीय कंपनी के फेल या दिवालिया होने की नौबत आने पर उसका समयबद्ध एवं व्यवस्थित समाधान हो सके। ज्यादातर अन्य तुलनात्मक देशों में वित्तीय कंपनियों से जुड़े मसलों के शीघ्र समाधान के लिए इस तरह की संस्थागत व्‍यवस्‍था मौजूद है। इसके अलावा, यह व्‍यवस्‍था जमाकर्ताओं के अनुकूल है क्‍योंकि किसी बैंक के विफल होने पर परिसमापन के बजाय उसकी समस्‍या का हल निकाला जाता है। कारण यह है कि परिसमापन की तुलना में बैंक की समस्‍या का समाधान होने पर जमाकर्ताओं को काफी अधिक मूल्य मिलने की संभावना रहती है।
इसमें वित्तीय कंपनियों के लिए पांच चरणों वाला वित्‍तीय सेहत वर्गीकरण शुरू करके वित्तीय कंपनियों में प्रारंभिक दिवालियेपन का पता लगाने की व्‍यवस्‍था की गई है।
एफआरडीआई विधेयक में कई अन्‍य समाधान उपायों का भी उल्‍लेख किया गया है जिनमें किसी वित्तीय कंपनी की समूची परिसंपत्तियों एवं देनदारियों अथवा इसके एक हिस्‍से को किसी अन्‍य व्‍यक्ति को हस्‍तांतरित करना, अधिग्रहण, विलय या एकीकरण, संकट से उबारने के उपाय करना, इत्‍यादि शामिल हैं।
एफआरडीआई विधेयक में जमा बीमा कार्यों को जमा बीमा एवं .ऋण गारंटी निगम के हाथों से लेकर समाधान निगम को हस्तांतरित करने का भी उल्‍लेख किया गया है, जो जमाकर्ताओं के संरक्षण और समाधान से जुड़े एकीकृत दृष्टिकोण पर लक्षित है।
एफआरडीआई विधेयक में जमाकर्ताओं के अधिकारों का संरक्षण करना और बढ़ाना
एफआरडीआई विधेयक में जमाकर्ताओं को मिली मौजूदा सुरक्षा को बेहद प्रतिकूल रूप से संशोधित नहीं किया गया है। एफआरडीआई विधेयक में जमाकर्ताओं को अपेक्षाकृत अधिक पारदर्शी तरीके से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसका विवरण निम्नानुसार है:
वर्तमान में, बैंकों में जमाराशि का 1 लाख रुपये तक का बीमा किया जाता है। इसी तरह का संरक्षण एफआरडीआई विधेयक के तहत भी जारी रहेगा। यही नहीं, समाधान निगम को जमा बीमा राशि में वृद्धि करने का अधिकार भी दिया गया है।
किसी बैंकिंग कंपनी के 1 लाख रुपये से अधिक की राशि‍ वाले गैर-बीमित जमाकर्ताओं को वर्तमान कानून के तहत असुरक्षित कर्जदातओं के बराबर ही माना जाता है और इसके परिसमापन की स्थिति में सरकारी बकाया सहित तरजीही बकायों की अदायगी के बाद उन्‍हें ही भुगतान किया जाता है। एफआरडीआई विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, किसी बैंक के परिसमापन की स्थिति में गैर-बीमित जमाकर्ताओं के दावे असुरक्षित कर्जदाताओं और सरकार की बकाया रकम के मुकाबले अधिक होंगे। अत: गैर-बीमित जमाकर्ताओं के अधिकार बेहतर ढंग से संरक्षित होंगे और इस तरह के जमाकर्ताओं को मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं की तुलना में एफआरडीआई विधेयक में कहीं ऊंचा दर्जा दिया जाएगा।
इस प्रकार, एफडीडीआई विधेयक के तहत जमाकर्ताओं (बीमित और गैर-बीमित  दोनों ही) के हित बेहतर ढंग से सुरक्षित होंगे।



http://pib.nic.in/newsite/PrintHindiRelease.aspx?relid=69969

वर्षांत समीक्षा – 2017 : खान मंत्रालय

वर्षांत समीक्षा – 2017 : खान मंत्रालय

http://pib.nic.in/newsite/PrintHindiRelease.aspx?relid=70004

राष्ट्रीय खनिज नीति 2008 की समीक्षा के लिए समिति
रिट याचिका (सिविल) संख्या 114 (2014) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2 अगस्त, 2017 को दिए गए निर्णय के आलोक में राष्ट्रीय खनिज नीति, 2008 की समीक्षा के लिए अपर सचिव (खान) की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया। 
खानों की स्टार रेटिंग  
सतत विकास फ्रेमवर्क के तहत खान मंत्रालय ने खानों की स्टार रेटिंग की पद्धति विकसित की है।
खान मंत्रालय ने सतत विकास फ्रेमवर्क के तहत खान गतिविधियों के लिए समावेशी विकास सिद्धांत अपनाया है। उससे वर्तमान और भविष्य के सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरण हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
2 स्तरों वाली पद्धति विकसित की गई है। इसके तहत खान संचालकों को स्वमूल्यांकन टैम्प्लेट में सूचनाएं देनी होंगी और भारत खान ब्यूरो इसकी वैधता की जांच करेगा।
स्टार रेटिंग के लिए मूल्यांकन टैम्प्लेट (प्रमुख खनिजों के लिए) को दिनांक 23 मई, 2016 को अधिसूचित किया गया।
खनन पट्टे के प्रदर्शन के आधार पर 1 से 5 स्टार रेटिंग की व्यवस्था की गई है। ऊंची रेटिंग वाले खान संचालकों को सतत खनन अभ्यासों को शीघ्र अपनाना होगा।
4 स्टार प्राप्त करने के लिए एमसीडीआर में स्टार रेटिंग को वैधानिक प्रावधान के अंतर्गत शामिल किया गया है। इसके लिए समय सीमा 2 वर्ष है।
उपायों के मूल्यांकन के लिए एक ऑनलाइन प्रणाली विकसित की गई है। इसे 18 अगस्त, 2016 को लांच किया गया। खान क्षेत्र द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया गया यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
कम महत्वपूर्ण खनिजों की स्टार रेटिंग के लिए भी टैम्प्लेट तैयार किया जा रहा है। 

राष्ट्रीय एलमुनियम कंपनी लिमिटेड (नाल्को)
प्रदर्शन के मुख्य बिंदु

वर्ष 2016-17 के दौरान बाक्साइड खानों और एलुमिना रिफाइनरी का उत्पादन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर रहा। बाक्साइड परिवहन 68.25 लाख एमटी (क्षमता का 100 प्रतिशत) रहा, जबकि एलुमिना हाइड्रेड का उत्पादन 21 लाख एमटी (क्षमता का 100 प्रतिशत) दर्ज किया गया।

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केंद्र सरकार ने कंपनी (संशोधित) अधिनियम- 2017 अधिसूचित किया

पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय
8 -जनवरी-2018 13:46 IST


केंद्र सरकार ने कंपनी (संशोधित) अधिनियम- 2017 अधिसूचित किया

केंद्र सरकार ने 3 जनवरी, 2018 को कंपनी (संशोधित) अधिनियम-2017 (संशोधित अधिनियम) को अधिसूचित कर दिया है। अधिनियम के प्रावधान सरकार द्वारा सरकारी गजट में अधिसूचना के निर्धारण की तिथि से प्रभावी होंगे। इस संशोधित अधिनियम के कुछ प्रावधान ऋणशोधन एवं दिवालिया संहिता 2016 की कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे।
कंपनी अधिनियम 2013 के अनुच्छेद 53 के अनुसार शेयरों को छूट पर देने के निकास पर रोक लगाई गई है। संशोधित अधिनियम के अंतर्गत अब कंपनियां ऋणदाता को छूट पर शेयर तब प्रदान कर पाएंगी जब परिवर्तित ऋण पुनर्गठन योजना या संविदा के तहत किसी संवैधानिक प्रस्ताव के अंतर्गत उनका ऋण शेयर में परिवर्तित होगा।
कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुच्छेद 197 के अंतर्गत कंपनी को सकल लाभ के 11 प्रतिशत से अधिक प्रबंधकीय वेतन प्रदान करने पर आमसभा में इसकी अनुमति लेनी होगी। संशोधित अधिनियम के अनुसार कंपनी किसी बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्थान या गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्रधारक या अन्य सुरक्षित ऋणदाताओं को भुगतान में चूक होने पर इस प्रकार के प्रबंधकीय वेतन प्रदान करने से पहले उनकी मंजूरी लेनी होगी और यह मंजूरी आमसभा से पहले लेनी होगी।
कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुच्छेद 247 के अंतर्गत पंजीकृत मूल्य आंकने वाले को किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूचि वाली संपत्ति या संपत्ति के आंकलन के दौरान या आंकलन के बाद रूचि वाली वाली संपत्ति के आंकलन पर रोक लगाई गई है। संशोधित अधिनियम में अब पंजीकृत मूल्य आंकने वाले को उसकी नियुक्ति से तीन वर्ष पहले या उसके द्वारा संपत्ति का मूल्यांकन करने के तीन वर्ष के बाद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूचि वाली संपत्ति के आंकलन पर रोक लगाई गई है।
कंपनी (संशोधित) अधिनियम 2017 वेबसाइट www.ibbi.gov.in  और www.mca.gov.in. पर उपलब्ध है।
   
वीएल/एएम/एजे/एसकेपी-6215

Estimates of Gross Domestic Product (GDP), Net Domestic Product (NDP) and National Income, measured as Net National Income (NNI)

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